साहित्य • संस्कृति • भाषा • विरासत

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन

हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित एक गौरवशाली साहित्यिक संस्था।

सम्मेलन के बारे में जानें

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के बारे में

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था है। यह संस्था साहित्यकारों, लेखकों, कवियों और हिन्दी प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करती है।

सम्मेलन द्वारा साहित्यिक गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, संगोष्ठियों, व्याख्यानों एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। संस्था का उद्देश्य हिन्दी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी को अपनी भाषा एवं संस्कृति से जोड़ना है।

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नवीनतम जानकारी

सूचना पट्ट

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01 सूचना

साहित्यिक कार्यक्रम एवं आगामी आयोजनों की जानकारी

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित होने वाले आगामी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूचना यहां प्राप्त करें।

02 कार्यक्रम

कवि सम्मेलन एवं साहित्यिक गोष्ठी

आगामी कवि सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठी एवं विशेष व्याख्यान से संबंधित सूचना जल्द प्रकाशित की जाएगी।

03 आमंत्रण

साहित्यकारों एवं हिन्दी प्रेमियों के लिए सूचना

सम्मेलन की विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों में सहभागिता के लिए सभी साहित्य प्रेमियों का स्वागत है।

04 सूचना

सम्मेलन की नवीनतम गतिविधियां

संस्था की नई गतिविधियों, आयोजनों और महत्वपूर्ण घोषणाओं की जानकारी सूचना पट्ट पर उपलब्ध होगी।

01 सूचना

साहित्यिक कार्यक्रम एवं आगामी आयोजनों की जानकारी

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित होने वाले आगामी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूचना यहां प्राप्त करें।

02 कार्यक्रम

कवि सम्मेलन एवं साहित्यिक गोष्ठी

आगामी कवि सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठी एवं विशेष व्याख्यान से संबंधित सूचना जल्द प्रकाशित की जाएगी।

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन

हमारा उद्देश्य

हिन्दी के प्रति समर्पण और साहित्य के प्रति सम्मान के साथ भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।

हिन्दी का प्रचार-प्रसार

हिन्दी भाषा के व्यापक प्रचार और प्रसार के लिए साहित्यिक एवं शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा हिन्दी के प्रति समाज में जागरूकता और रुचि विकसित करना।

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साहित्य का संरक्षण

हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं, परंपराओं और साहित्यिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा साहित्य की समृद्ध परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना।

साहित्यकारों को मंच

नवोदित और प्रतिष्ठित साहित्यकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना तथा साहित्यिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना।

साहित्यिक गतिविधियाँ

गोष्ठियों, सम्मेलनों, व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं और अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन कर साहित्यिक संवाद एवं रचनात्मक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देना।

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की गौरवशाली विरासत
1919 स्थापना वर्ष
हमारी विरासत

स्थापना एवं
गौरवशाली विरासत

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना 19 अक्टूबर 1919 को मुज़फ़्फ़रपुर के हिन्दू भवन में हिन्दी-सेवियों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रयासों से हुई।

इसका प्रथम अधिवेशन 8–9 नवम्बर 1919 को सोनपुर मेले में आयोजित हुआ। 1936 में सम्मेलन का मुख्यालय पटना स्थानांतरित हुआ। एक शताब्दी से अधिक की अपनी गौरवशाली यात्रा में सम्मेलन ने हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आज भी सम्मेलन अपनी इसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है और हिन्दी भाषा एवं साहित्य के विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

हमारी विरासत जानें
सम्मेलन की विरासत

एक समृद्ध साहित्यिक विरासत

हिन्दी भाषा और साहित्य की निरंतर यात्रा

1919

सम्मेलन की स्थापना

19 अक्टूबर 1919 को मुज़फ़्फ़रपुर के हिन्दू भवन में हिन्दी-सेवियों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रयासों से बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई।

8–9 नवम्बर 1919

प्रथम अधिवेशन

सम्मेलन का प्रथम अधिवेशन सोनपुर मेले में आयोजित हुआ, जिसने बिहार की साहित्यिक चेतना को एक संगठित मंच प्रदान किया।

1936

मुख्यालय पटना स्थानांतरित

वर्ष 1936 में सम्मेलन का मुख्यालय पटना स्थानांतरित हुआ और इसकी साहित्यिक गतिविधियों का विस्तार निरंतर जारी रहा।

100+ वर्ष

गौरवशाली साहित्यिक यात्रा

एक शताब्दी से अधिक समय से सम्मेलन हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्यरत है।

हिन्दी भाषा और साहित्य की निरंतर यात्रा

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास की एक महत्वपूर्ण यात्रा है। सम्मेलन से अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, विद्वान और हिन्दीसेवी जुड़े रहे हैं। सम्मेलन ने विभिन्न कालखंडों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक विमर्श, प्रकाशन और साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

सन् 1910 में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना के बाद हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई। इसी साहित्यिक चेतना से प्रेरित होकर बिहार में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हुए।

पूरा इतिहास पढ़ें
हमारी प्रमुख गतिविधियाँ

साहित्यिक गतिविधियों की निरंतर परंपरा

हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मेलन द्वारा विभिन्न साहित्यिक एवं शैक्षिक गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जाता है।

01

साहित्यिक गोष्ठियाँ

साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों के बीच विचार-विमर्श एवं साहित्यिक संवाद के लिए गोष्ठियों का आयोजन।

02

व्याख्यान एवं परिचर्चा

हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और समकालीन विषयों पर विद्वानों के व्याख्यान एवं परिचर्चाएँ।

03

साहित्यिक अधिवेशन

साहित्यकारों, विद्वानों और हिन्दीसेवियों की सहभागिता से साहित्यिक अधिवेशनों का आयोजन।

04
📖

प्रकाशन

हिन्दी साहित्य से संबंधित महत्वपूर्ण रचनाओं और शोधपरक सामग्री के प्रकाशन को प्रोत्साहन।

05
🏆

प्रतियोगिताएँ

हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति विद्यार्थियों एवं युवाओं में रुचि विकसित करने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन।

06

हिन्दी प्रशिक्षण

हिन्दी भाषा के अध्ययन एवं प्रचार-प्रसार से संबंधित शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन

संस्था का संरचनात्मक विवरण

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की साहित्यिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को संचालित करने वाले पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों का परिचय।

अध्यक्ष

डॉ. अनिल सुलभ

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष

प्रमुख पदाधिकारी

01

उपाध्यक्ष

श्री जियालाल आर्य भा.प्र.से. (से.नि.)
डॉ. उपेन्द्रनाथ पाण्डेय भा.प्र.से. (से.नि.)
डॉ. महेन्द्र मधुकर
डॉ. शंकर प्रसाद
डॉ. मधु वर्मा
डॉ. कल्याणी कुसुम सिंह
डॉ. कुमार अरुणोदय
02

प्रधान मंत्री

डॉ. शिववंश पाण्डेय

03

साहित्य मंत्री

श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी

04

अर्थ मंत्री

श्री कुमार अनुपम

05

प्रबंध मंत्री

श्री कृष्ण रंजन सिंह

06

प्रचार मंत्री

श्रीमती विभा रानी श्रीवास्तव

07

पुस्तकालय मंत्री

ई. अशोक कुमार

08

कला मंत्री

डॉ. पल्लवी विश्वास

09

लोकभाषा मंत्री

डॉ. एषा जमुआर

10

संगठन मंत्री

डॉ. शालिनी पाण्डेय

11

भवन अधीक्षक

श्री प्रवीर कुमार पंकज

कार्यकारिणी सदस्य

सम्मेलन की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले कार्यकारिणी सदस्य।

01 श्री आर. पी. घायल
02 श्री बच्चा ठाकुर
03 आचार्य विजय गुंजन
04 डॉ. पूनम आनंद
05 श्रीमती आराधना प्रसाद
06 श्री श्याम बिहारी प्रभाकर
07 डॉ. नागेश्वर प्रसाद यादव
08 ई. बाँके बिहारी साव
09 श्री आनंद किशोर मिश्र
10 डॉ. सुमेधा पाठक
11 श्री सिद्धेश्वर
12 श्रीमती शमा कौसर ‘शमा’
13 डॉ. मीना कुमारी परिहार
14 डॉ. ऋचा वर्मा
15 श्री जयप्रकाश पुजारी
16 डॉ. अर्चना त्रिपाठी
17 श्रीमती सागारिका राय
18 डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी
19 श्री अम्बरीष कांत
20 श्रीमती चन्दा मिश्र
21 डॉ. अमरनाथ प्रसाद
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