







बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के बारे में
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण साहित्यिक संस्था है। इसकी स्थापना हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने और साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई।
सम्मेलन ने अपने लंबे इतिहास में हिन्दी के अनेक विद्वानों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और साहित्यप्रेमियों को जोड़ने का कार्य किया है। साहित्यिक गोष्ठियों, अधिवेशनों, शोध एवं प्रकाशन गतिविधियों तथा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सम्मेलन हिन्दी की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में निरंतर योगदान देता रहा है।
हमारा उद्देश्य
हिन्दी के प्रति समर्पण और साहित्य के प्रति सम्मान के साथ भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाना हमारा प्रमुख उद्देश्य है।
हिन्दी का प्रचार-प्रसार
हिन्दी भाषा के व्यापक प्रचार और प्रसार के लिए साहित्यिक एवं शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
साहित्य का संरक्षण
हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं, परंपराओं और साहित्यिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना।
साहित्यकारों को मंच
नवोदित और प्रतिष्ठित साहित्यकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए मंच उपलब्ध कराना।
साहित्यिक गतिविधियाँ
गोष्ठियों, सम्मेलनों, व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं और अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करना।
स्थापना एवं गौरवशाली विरासत
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना 19 अक्टूबर 1919 को मुज़फ़्फ़रपुर के हिन्दू भवन में हिन्दी-सेवियों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रयासों से हुई। इसका प्रथम अधिवेशन 8–9 नवम्बर 1919 को सोनपुर मेले में आयोजित हुआ।
1936 में सम्मेलन का मुख्यालय पटना स्थानांतरित हुआ। एक शताब्दी से अधिक की अपनी गौरवशाली यात्रा में सम्मेलन ने हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आज भी सम्मेलन अपनी इसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
विरासत
एक समृद्ध साहित्यिक विरासत हिन्दी भाषा और साहित्य की निरंतर यात्रा
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास की एक महत्वपूर्ण यात्रा है। सम्मेलन से अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, विद्वान और हिन्दीसेवी जुड़े रहे हैं।
सम्मेलन ने विभिन्न कालखंडों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक विमर्श, प्रकाशन और साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
सन् 1910 में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना के बाद हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई। इसी साहित्यिक चेतना से प्रेरित होकर बिहार में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हुए।
साहित्यिक गतिविधियों की निरंतर परंपरा
हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मेलन द्वारा विभिन्न साहित्यिक एवं शैक्षिक गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जाता है।
साहित्यिक गोष्ठियाँ
साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों के बीच विचार-विमर्श एवं साहित्यिक संवाद के लिए गोष्ठियों का आयोजन।
व्याख्यान एवं परिचर्चा
हिन्दी भाषा, साहित्य, संस्कृति और समकालीन विषयों पर विद्वानों के व्याख्यान एवं परिचर्चाएँ।
साहित्यिक अधिवेशन
साहित्यकारों, विद्वानों और हिन्दीसेवियों की सहभागिता से साहित्यिक अधिवेशनों का आयोजन।
प्रकाशन
हिन्दी साहित्य से संबंधित महत्वपूर्ण रचनाओं और शोधपरक सामग्री के प्रकाशन को प्रोत्साहन।
प्रतियोगिताएँ
हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति विद्यार्थियों एवं युवाओं में रुचि विकसित करने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन।
हिन्दी प्रशिक्षण
हिन्दी भाषा के अध्ययन एवं प्रचार-प्रसार से संबंधित शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों का साझा मंच
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन साहित्यकारों, कवियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और हिन्दीप्रेमियों को एक ऐसा मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ साहित्य और विचारों का स्वतंत्र एवं सार्थक संवाद हो सके।
आगामी कार्यक्रम
आगामी कार्यक्रम
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा समय-समय पर साहित्यिक गोष्ठियों, व्याख्यानों, अधिवेशनों, प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
यहाँ आप सम्मेलन के आगामी और पिछले कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।